रंगों की राजनीति

जैसा कि आप सब जानते हैं कि रंग हमारे जीवन में क्या महत्व रखते हैं, बिना रंगो के हमारा जीवन बेरंगा होता ! हर एक रंग का अपना एक महतव होता है|
कोई रंग खुशी का प्रतीक होता है, कोई रंग शांति का प्रतीक होता है’ तो कोई रंग शौर्य का प्रतीक होता है, इसी तरह सभी रंगो का अपना अपना महत्व होता है लेकिन सोचिए यदि हम किसी एक रंग को ही अपनी पहचान बना लेंगे तो क्या होगा ?
जैसा कि आप सब जानते ही होंगे की राजनीति मैं भी कुछ लोग धर्म की राजनीति तो करते ही हैं, आजकल रंगो की राजनीति भी खूब कर रहे हैं |
जी हां दोस्तों आजकल आप एक ही रंग का नाम बहुत सुनते होंगे और अपने आसपास देखते भी होंगे|

मैं बात कर रहा हूं भगवा रंग की जो रंग त्याग और सन्यास का प्रतीक है राजनीति में आकर न जाने कब हिंदुओं की पहचान बन गया पता ही नहीं चला
दरअसल रंगों का चयन हम अपने पसंद के अनुसार करते हैं| किसी और के कहने पर हम किसी खास रंग को अपने धर्म का आधार कैसे मान सकते हैं|
आज जिस रंग को हिंदुत्व से जोड़ा जा रहा है वो रंग कहां से आया और कब हिंदुत्व की पहचान बन गया आइए जानते हैं|
“भगवा रंग त्याग बलिदान ज्ञान शुद्धता शौर्य एवं सेवा का प्रतीक है भगवा रंग को राजपूतों मैं भी बहुत सम्मान से देखा जाता है क्योंकि भगवा रंग सूर्य के प्रकाश के समान होता है जोकि ऊर्जा का प्रतीक है इसलिए केसरिया रंग का साफा और ध्वजा का ज्यादा उपयोग किया जाता हे इसी तरह और भी हमारे देश के राजा महाराजा वीर योद्धा भी युद्ध के वक्त इसी केसरिया या भगवा रंग के ध्वजा का इस्तेमाल करते थे सन्यासी भी इसी भगवा रंग का इस्तेमाल करते है क्योंकि यह रंग त्याग का बलिदान का शुद्धता का प्रतीक है सन्यासी इस रंग के वस्त्रो का उपयोग करते है ताकि और लोग यह जान सके कि भगवा रंग के वस्त्र पहने हुए यह व्यक्ति सब कुछ त्याग चुका है जिसे किसी भी चीज की मोहमाया नहीं है वह व्यक्ति केवल मोक्ष की तलाश में है और अपने ईश्वर की भक्ति में लीन रहना चाहता है”
लेकिन आज के कुछ लोग सन्यासी जेसी वस्त्र पहनना पसंद करते हैं लेकिन सन्यासी जैसा एक भी काम नहीं करते हैं उल्टा लोगों को भ्रमित करके धर्म और रंगो की राजनीति करते हैं और लोगों को आपस में लड़वाते हैं|

दोस्तों यदि हम लोग फूलों के गुलदस्ते की तरह एक होकर रहे तो कितना अच्छा हो जिस तरह एक गुलदस्ते में भी अलग अलग रंग के और अलग-अलग प्रकार के फूल होते हैं फिर भी यह सब एक साथ बहुत सुंदर दिखाई देते हैं उसी तरह हम सभी धर्मों के लोग भी एक साथ मिल कर रहे तो हमारा देश कितना सुंदर बन जाएगा !
सारे रंग ही अच्छे हैं, यदि हम हमारे देश के तिरंगे को देखें तो वह सबसे बढ़ा उदाहरण है एकता का !
इसके तीनों रंगो के कपड़े को जब आप गौर से देखोगे तो यह जानोगे के जब यह तीनों रंग के कपड़े अलग अलग होते हैं तो यहां केवल एक कपड़ा होता है जो की हे केसरिया सफेद और हरे रंग का कपड़ा होता है यदि हम इन्हें सही क्रम में जोड़ दें तो वहीं साधारण कपड़ा देश की आन बान और शान तिरंगा बनजाया करता है ”
“हरा तुम लाओ
हम केसरिया लाते हैं,
” थोड़ा तुम समझो थोड़ा हम समझे चलो मिलकर देश को आगे बढ़ाते हैं”
“हरे और भगवा रंग मे बांटने वालों अब हमें आपस में लड़ाना छोड़ दो
“लाल और हरे में मत बांटो मेरी छत पर तिरंगा रहने दो”|

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