सबका साथ सबका विकास | Opinion | Indian Politics | NDA | UPA

जब भी हम विकास के बारे में बात करते  हैं तो हम अक्सर यही सोचते है की विकास का मतलब

ऊंची बिल्डिंगे,बड़े-बड़े ब्रिज, लंबी चौड़ी सड़कें,सड़कों पर दौड़ती लग्जरी कारें, हर शहर से गुजरती बुलेट ट्रेन

सचमुच आपको भी  यह सब हास्य पद लग रहा होगा लेकिन इसमें आपकी गलती नहीं है, गलती उन नेताओं की है जो सत्ता पाने के लिए आम जनता को विकास की एक अलग सी ही तस्वीर दिखाते हैं।

विकास कहां और कितना हुआ है यह सब जानने से पहलैं हमें विकास को समझना पड़ेगा।

इस देश के विकास के लिये सबसे पहले हमें देश के हर एक गरीब व्यक्ति को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना पड़ेगा। हर सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को और बेहतर करना पड़ेगा, देश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार  देना पड़ेगा, और उन्हें नई नई टेक्नोलॉजी से अवगत कराना पड़ेगा,

हमें यह भी समझना पड़ेगा कि देश के युवाओं के लिए केवल चाय बेचना और पकौड़े तलना यही एकमात्र रोजगार नही है। इसके अलावा भी कई विकल्प हैं।

आपने एक जुमला बहुत सुना होगा

“सबका साथ सबका विकास”

लेकिन क्या सच में ऐसा हुआ है

यदि हम पिछले 4 वर्षों के विकास के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे की एनडीए का प्रदर्शन उम्मीदों से कमतर रहा है।

2014 के चुनावी भाषणों में मोदी जी ने जिस अच्छे दिन के वादे का जिक्र किया था, वह दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा।

याद कीजिए, पदभार संभालने के कुछ महीने बाद ही वित्त मंत्री ने काफी यकीन साथ यह दावा किया था  की अर्थव्यवस्था अपने सबसे खराब दौर से निकल चुकी है, और अब यह शिखर की ओर बढ़ रही है।

3 वर्षों के बाद सबसे निष्पक्ष आंकड़ों के मुताबिक 2016 -17 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 2013 – 14 की जीडीपी वृद्धि ( 6.9 प्रतिशत ) के बराबर या उससे भी कम है।

आर्थिक विकास के हिसाब से 2013- 14 मैं अर्थव्यवस्था को लेकर चारों ओर निराशा छाई हुई थी.

2014 के चुनाव में भाजपा ने इस तथ्य को खूब भूनाया था और अपने चुनाव प्रचार में अच्छे दिन का नारा दिया था. शुद्ध आंकड़ों के हिसाब से अब तक के एनडीए शासन में संगठित क्षेत्र में जितनी नई नौकरियों का निर्माण हुआ है वह यूपीए के आखरी 3 साल की तुलना में आधे से भी कम है।

हर 3 महीने पर श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किया जाने वाला यह आंकड़ा मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी का सबब है. जब अमित शाह जी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में  उनके  संगठित क्षेत्र मैं  रोजगार निर्माण में आई गिरावट के बारे में  सवाल पूछा गया, तो वे कोई  संतोषजनक  जवाब  नहीं दे पाए|

रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा की 125 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैया कराना नामुमकिन है, अमित शाह जी के बयान का अर्थ निकाले तो श्रम बाजार में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को अपनी चिंता खुद करनी पड़ेगी।

स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय का मानना है की एनडीए सरकार अपने 3 वर्षों में जोबलेस युवाओं के  लिए उनके  किए हुए वादे के अनुसार जॉब दिला पाने में नाकाम रही है।

भले ही मोदी जी अपने अच्छे संवाद कोशल का इस्तेमाल लोगों को यह समझाने के लिए कर रहे हो कि एनडीए के आने के बाद हालात पहले से बेहतर हुए हैं लेकिन बढ़ती बेरोजगारी की हकीकत को  झूठलाना आसान नहीं है।

एनडीए का एक और दावा काले धन की अर्थव्यवस्था को साफ करने का था, इसके लिए विदेशों में जमा काला धन लाने के लिए कठोर कानून बनाया गया और 2016 -17 मैं आय की कई नई योजनाएं लाई गई,

जिसमें सबसे बड़ा नोटबंदी का फैसला था |

लेकिन जिस प्रकार के दावे नोटबंदी को लेकर किए गए थे वैसा कोई परिणाम नहीं दिखाई दिया,

मोदी सरकार नोट बंदी से काला धन तो वापस नहीं  ला सकी, हां लेकिन नई रंगीन नॉटे जरूर ले आई।

आजकल विकास का एक और नया रूप देखने को मिल रहा है, देश के बड़े-बड़े महान नेताऔ व व्यक्तियों के बड़े-बड़े स्टेचू बना कर देश के सामने यह दर्शाया जा रहा है कि यह भी देश का विकास है

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी को बनाने का फैसला सही हैं  यह हमारे देश के लिए बड़े सम्मान की बात है, की अब विश्व का सबसे बड़ा स्टेचू हमारे देश में है।

लेकिन यदि हम स्टेचू ऑफ यूनिटी के बनाने की लागत की बात करें तो इसमें करीब 2,989 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इतनी बड़ी रकम से तो देश में विकास के कई काम किए जा सकते थे।

जिस देश की 34 करोड़ 47 लाख आबादी गरीबी रेखा के नीचे हो

और जिस देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भूखा सोता हो उनमें भी बच्चों की तादाद सबसे सबसे अधिक हो

तो यह सवाल उठता है कि ऐसे हालात में इस तरह के बड़े स्टेचू बनाकर क्या देश का विकास हो सकता है |

मैं यहां एक बात स्पष्ट कर दूं  की  मैं किसी भी महान पुरुष या व्यक्ति के स्टेचू बनाने का विरोध नहीं करता हूं

 

देश झेल रहा है अब तक बेरोजगारी की मार,

विकास के नाम पर राजनीति क्यों होती है हर बार”

जहां आज भी रोजगार नहीं है युवाओं के पास

तो फिर कैसे होगा इस देश का विकास”

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